पापा की प्रिन्सेस हु मै ..
मेरे पती की लाड़ली बीबी हूं मैं ।
मेरी भाई की स्वीट वाली सिस्टर हूं मै ।।
मेरी सिस्टर की होम मिनिस्टर हूं मैं ।
फिर भी आसू ओ से फ्रेंड शीप की है मैंने ।।
हजारों मैल दूर है खुशियां मेरी ।
ना या द आ रही है , किसी की ,
ना तो दिल चिंता कर रहा है । किसी की .
मै तो गुम रहती हूं खयालों में ।
ना किसी की बनना चाहती हूं ।।
ना किसी को अपनाना चाहती हूं ।
मै तो बस मुझ मै ही जीना चाहती हूं ।।
मै सिर्फ मेरे लिए जीना चाहती हूं ।।
मुझे ना किसी से उम्मीद है ।।
ना ही कोई मुझसे उम्मीद रखे ।
मुझे मेरे तरीके से जीने दीजिए ।।
और आप अपने तरीके से जिय ।
मुझे आजाद कीजिए ।
इस झूठे मायाजाल मै रहना नहीं चाहती हूं ।
दुर्गा मते
सदर रचना काल्पनिक
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