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May 19, 2022

मुझे जीने दीजिए।।

पापा की प्रिन्सेस हु मै ..

मेरे पती की लाड़ली बीबी हूं मैं ।

मेरी भाई की स्वीट वाली सिस्टर हूं मै ।।

मेरी सिस्टर की होम मिनिस्टर हूं मैं ।

फिर भी आसू ओ से फ्रेंड शीप की है मैंने ।।

हजारों मैल दूर है खुशियां मेरी ।

ना या द आ रही है , किसी की ,

ना तो दिल चिंता कर रहा है । किसी की .

मै तो गुम रहती हूं खयालों में ।

ना किसी की बनना चाहती हूं ।।

ना किसी को अपनाना चाहती हूं ।

मै तो बस मुझ मै ही जीना चाहती हूं ।।

मै सिर्फ मेरे लिए जीना चाहती हूं ।।

मुझे ना किसी से उम्मीद है ।।

ना ही कोई मुझसे  उम्मीद रखे ।

मुझे मेरे तरीके से जीने दीजिए ।।

और आप अपने तरीके से जिय ।

मुझे आजाद कीजिए ।
इस झूठे मायाजाल मै रहना नहीं चाहती हूं ।
दुर्गा मते

सदर रचना काल्पनिक


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