आधा अधूरा ,
रह गया है ।
एक सपना ,
जुदा हो गया है।
कोई मेरा अपना ।।
दिल का दर्द ,
मै कैसे बताऊं ।
रूठा हुआ एक दिल ,
उसे कैसे मनाऊ ।।
कितना प्यार था ,
एक दूजे से ।
फिर भी क्यू ,
नाराज हुआ मुझ से ।।
दिल में ,
एक अरमा तेरे लिए ,
ही बनाया है ।।
हजार बार कह चुका था ।
फिर भी ऐसे ,
बिना वजह से ,
क्यू वो मुझसे जुदा हो गया ।।
दुर्गा मते
©®
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