क्या कहे कितनी मोहबत्त करते हैं आपसे ।
चाहकर भी पा नहीं सकते ,
ये जानते हुए भी प्यार हुआ है आपसे ।।
हर पल आप याद आते हो ।
में चाहकर भी आपके सामने नहीं आ सकती ।।
जब सामने आने की कोशिश करती हूं ।।
तब हमेशा रोती हू ।।
जानती हूं आप मुझसे नहीं मेरे बहन से प्यार करते हो ।।
में उसका दुख बाटना चाहती है ।
खुशी नही इसलिए तो खुद को रोखती हूं ।।
दर्द दिल का छिपाकर मुस्कुराती हूं ।
वास्तविक काही नाही काल्पनिक आम्ही पाटलांच्या पोरी प्रेम करू शकत नाही . जे वडील सुचवतील त्यांच्यावर प्रेम करू . प्रेम फक्त कल्पनेत च आवडत आम्हाला ...🙈🙈😜😜😂😂
बेहतरीन प्रस्तुती...👌👍💐🍫
ReplyDeleteवा, खूप सुंदर रचना 👌👌👌👌
ReplyDelete